Chhalaang Review:  खेल के बहाने जिंदगी का असल महत्व समझाती है ''छलांग'', फिल्म में राजकुमार का उम्दा काम

11/13/2020 12:56:41 PM

मुंबई: लाइफ में हमें कई ऐसा लोग मिलें होंगे जो जिंदगी में हिम्मत ना हारना की सलाह देते हैं  लेकिन जब तक आप खुद अपने हालातों से लड़ नहीं पाते तो दूसरों को बोलना बेकार है। अपने आप को बेहतर बनाने, आगे बढ़ने, जीवन में इज्जत पाने और मिसाल कायम करने के लिए खुद आगे बढ़ना होता है। यहीं एक कदम आगे लेकर खेल के माध्यम से जीवन में कुछ करने की सीख देती है राजकुमार राव और नुसरत भरुचा स्टारर 'छलांग'। 

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फिल्म की कहानी

कहानी की शुरुआत हरियाणा में होती है। मोहिंदर हुड्डा उर्फ मोन्टू (राजकुमार) एक सरकारी स्कूल का पीटीआई यानी पीटी टीचर है। मोन्टू की लाइफ बेहद ही आराम से कट रही होती है। वह स्कूल के बच्चों को कभी कुछ सिखा देता है वरना ग्राउंड में बैठा कर बस टाइम पास करता है। मोन्टू नेअपनी लाइफ के कुछ बड़ा नहीं करता बस  चीजों को अधूरा ही छोड़ा है क्योंकि यह करना आसान होता है। उसे अपने पिता के कहने पर  उसी स्कूल में नौकरी मिलती है जिसमें वो बचपन में पढ़ा था।

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मोन्टू की दोस्ती उसी के स्कूल टीचर वेंकट (सौरभ शुक्ला) से है। मोन्टू की जिंदगी  सही चल रही थी पर जैसी ही स्कूल में नीलिमी मैडम (नुसरत भरुचा) जो एक कंप्यूटर टीचर हैं की एंट्री होती है तो उसकी लाइफ में बदलाव आता है। नीलिमी को पटाने के लिए मोन्टू कोशिशें करने लगता है। वहीं अगर प्रेम कहानी शुरु हुई है तो विलेन की एंट्री होनी तो बनती है।  तो एक दिन स्कूल में आते है नए पीटी टीचर मिस्टर सिंह (मोहम्मद जीशान अयूब)।

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मिस्टर सिंह के आने से मोन्टू की नौकरी, छोकरी और इज्जत सब कुछ ही  छिनने की कगार पर होता है। जिसके बाद मोन्टू को लगता है कि अब कुछ ना कुछ तो करना ही होगा। तब मोन्टू, मिस्टर सिंह संग स्पोर्ट्स कम्पटीशन लड़ने का फैसला करता है, जिसमें दोनों स्कूल के बच्चों को ट्रेन कर एक दूसरे से मुकाबला करवाएंगे और जो जीतेगा, वो सबकुछ पा लेगा यानि छोकरी भी और नौकरी भी। 

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परफॉरमेंस

राजकुमार राव बॉलीवुड के उन एक्टर्स में से हैं, जो अपनी एक्टिंग से कभी फैंस को निराश नहीं करते। उन्हें कोई भी रोल दिया जाए वह उसमें दिलों जान से अपना बना लेते हैं। छलांग में भी उन्होंने ऐसा ही किया है। मोन्टू का किरदार जितना सीधा है, उतना ही मस्तीखोर भी है और उससे भी ज्यादा बड़ी बात कि वो अपने हालात को बदलने की राह पर जब चल पड़ता है तो हार नहीं मानता।नुसरत भरुचा ने अच्छा काम किया है।

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उनका रोल भले ही छोटा सा हो लेकिन उनका काम और अंदाज देखने लायक है। वहीं अगर  सपोर्टिंग रोल्स की बात करें तो  मोन्टू के पिता के रोल में सतीश कौशल, दोस्त और टीचर के रोल में सौरभ शुक्ला, मां के रोल में बलजिंदर कौर और स्कूल की प्रिंसिपल के रोल में ईला अरुण ने भी शानदार काम की है। फिल्म के 'विलेन' मिस्टर सिंह के रोल में मोहम्मद जीशान अयूब ने भी बढ़िया काम किया। ओवर ऑल कहें तो फिल्म अच्छी है। फिल्म छलांग की कामयाबी की वजह भी यही है इसकी बाॅडी तो एक स्पोर्ट्स फिल्म की है लेकिन  इसकी आत्मा जिंदगी के सबक सिखाने में कामयाब है। 
 


Smita Sharma


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