बॉलीवुड में सामने आया वैक्सीनेशन घोटाला, निर्माता रमेश तौरानी हुए फर्जीवाड़े का शिकार, बोले- पता नहीं कौन सी वैक्सीन लगी

6/18/2021 2:09:40 PM

मुंबई. बॉलीवुड इंडस्ट्री में हाल ही में फर्जी फर्जी टीकाकरण मुहिम के मामले सामने आए हैं। मशहूर निर्माता रमेश तौरानी इस फर्जीवाड़े का शिकार हो गए हैं। दरअसल, कुछ प्रोडक्शन हाउस के मेंबर्स को हाल ही में टीका लगा था, लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उन्हें कौन सी वैक्सीन लगाई गई। इसी सिलसिले में बातचीत करते हुए फिल्म निर्माता और टिप्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मालिक रमेश तौरानी ने बताया कि उन्होंने अपने 365 कर्मचारियों को 30 मई और 3 जून को टीका लगवाया था, लेकिन उन्हें अब तक सर्टिफिकेट नहीं मिला है।

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मीडिया से बातचीत करते हुए रमेश तौरानी ने बताया, हम वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट का इंतजार कर रहे हैं। जब मेरे कर्मचारियों ने उनसे (एसपी इवेंट के संजय गुप्ता) संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेट शनिवार (12 जून) तक आ जाएगा। हमने प्रति डोज 1200 रुपए और जीएसटी अलग से देकर 365 कर्मचारियों का टीकाकरण करवाया। लेकिन पैसे से ज्यादा हम इस बात को लेकर चिंता में हैं कि हमें क्या दिया गया? यह असली कोवीशील्ड थी या कोई सलाइन वाटर। हमें कहा गया था कि सर्टिफिकेट कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल से मिलेगा।

 

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ऐसा ही मामला एक अन्य प्रोडक्शन हाउस मैचबॉक्स पिक्चर्स से भी सामने आया है। एसपी इवेंट की ओर से 29 मई को इस प्रोडक्शन हाउस के करीब 150 कर्मचारी और फैमिली मेंबर्स को कोवीशील्ड का पहला डोज दिया था। इन कर्मचारियों को भी यही कहा गया कि वे अपना सर्टिफिकेट कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल से ले सकते हैं। लेकिन दो सप्ताह बाद उन्हें अपना सर्टिफिकेट नानावटी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल से मिला, जिसमें डोज लेने की तारीख 12 जून लिखी गई।


मैचबॉक्स के एक कर्मचारी के मुताबिक, ‘हमें डोज लेने के बाद वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट नहीं दिया गया। कंपनी ने कहा कि बैकलॉग की वजह से हमारे सर्टिफिकेट एक सप्ताह बाद जारी हो पाएंगे। हमें चिंता हो रही थी, क्योंकि हममें से किसी ने भी वैक्सीनेशन के बाद के लक्षण महसूस नहीं किए।’ 


इस मामले में मैचबॉक्स पिक्चर्स के प्रोड्यूसर संजय राउत्रे ने कहा कि यह जांच का विषय है कि टिप्स और उनकी कंपनी द्वारा दो अलग-अलग दिनों में आयोजित की गई। इस वैक्सीनेशन ड्राइव के तहत जितने भी लोगों को भी वैक्सीन लगाई गई थी वो असली थी या नहीं और अभियान को आयोजित करने वाली कंपनी की तरफ से सर्टिफिकेट देने में इतनी देरी क्यों हो रही है। मुंबई पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और जल्द ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।

पिछले दिनों मुंबई के कांदिवली इलाके में मौजूद हीरानंदानी एस्टेट सोसाइटी के निवासियों ने दावा किया कि वे फेक वैक्सीनेशन घोटाले का शिकार हुए हैं। सोसाइटी के 300 से ज्यादा लोगों को इसके जरिए ठगा गया। बताया जा रहा है कि सोसाइटी की कमेटी की ओर से 30 मई को वैक्सीनेशन कैंप लगाया गया था और प्रति डोज 1260 रुपए चार्ज किए गए थे। वैक्सीन देने वालों ने खुद को कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल से संबंधित बताया था।

कैसे सामने आया ये घोटाला
पीड़ितों की मानें तो वैक्सीन लगाते समय उनकी जानकारी कोविड ऐप पर डालने की बजाय एक एक्सेल शीट में भरी गई थी। कुछ लोगों को तभी शक हुआ था, लेकिन सोसाइटी वालों को देखते हुए कुछ नहीं कहा। बताया जा रहा है कि इस घोटाले से पर्दा तब हटा, जब सर्टिफिकेट अलग-अलग अस्पतालों से जारी किए गए। किसी को यह सर्टिफिकेट BMC की ओर से, किसी को नानावटी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल तो किसी को शिवम हॉस्पिटल की ओर से मिला।

जब नानावटी हॉस्पिटल से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस तरह का कोई भी वैक्सीनेशन कैंप लगाए जाने की बात से इंकार किया। खास बात यह है कि इतनी बड़ी सोसाइटी में से किसी को भी वैक्सीनेशन के बाद बुखार या अन्य कोई लक्षण नहीं आए। इसने सोसाइटी के लोगों की चिंता और बढ़ा दी और वे खुद को ठगा महसूस करने लगे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।


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suman prajapati


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