Movie review: तब्बू-रकुल प्रीत की एक्टिंग काबिले तारीफ, उलझे दिखे अजय देवगन

5/17/2019 11:03:29 AM

मुंबई: बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन की फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इसमें अजय के साथ तब्बू और रकुल प्रीत सिंह लीड रोल में है। इस मल्टीस्टारर फिल्म के ट्रेलर की काफी तारीफ हुई थी। अजय देवगन-तब्बू-रकुल प्रीत सिंह जैसे स्टार्स से सजी फिल्म को आकिव अली ने डायरेक्ट किया है। कहानी-प्रोडक्शन लव रंजन का है।

 

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कहानी 

फिल्म की कहानी काफी सिंपल है। जिसकी शुरुआत लंदन से होती है। एक 50 साल का बिजनेसमैन आशीष (अजय देवगन) है, जो परिवार से अलग रहता है, वह 26 साल की लड़की आयशा (रकुल प्रीत सिंह) से मिलता है। एक गाना आता है और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती हैं, बात आगे बढ़ी तो प्यार हो गया। आशीष को लगा आयशा को अपने परिवार से मिलाऊं, तो वह इंडिया आता है। वहां पर अपनी पत्नी मंजू (तब्बू), बेटा-बेटी-माता-पिता से मिलवाता है। मंजू और आयशा में कुछ खटपट होती है, आशीष को देख उसकी बेटी नाराज हो जाती है और उसका रिश्ता खतरे में आ जाता है। आशीष रिश्ता जुड़वा देता है, इतनी देर में आयशा लंदन चली जाती है। मंजू और आशीष के बीच सब ठीक होने लगता है। लेकिन आशीष का दिल अभी भी आयशा के साथ है और फिर बेटी की शादी के दौरान आशीष-आयशा एक हो जाते हैं। मंजू अलग ही रहती है।

 

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डायरेक्शन

फिल्म के पहले हाफ में रकुल प्रीत सिंह आपको चौंका सकती हैं, क्योंकि जिस हिसाब से उनके पास अच्छे पंच हैं और उन्होंने जैसे उसका इस्तेमाल किया है वह उनके करियर के हिसाब से काबिले तारीफ है। वहीं, तब्बू ने दूसरे हाफ में समां बांध दिया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज एक्टिंग ने डूबते हुए दूसरे हाफ में भी दर्शकों को बांध कर रखा।

 

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कमजोरियां


फिल्म की कहानी जिस तरह से रची गई है वो ही आपको अपने आप में खटक सकती है। वो इसलिए क्योंकि फिल्म के दौरान कई जगह आपको मिसमैच दिखेगा, जो ना सिर्फ एक क्रिटिक बल्कि आम दर्शक भी देख सकेगा। फिल्म के सारे अच्छे पंच रकुल के नाम कर दिए गए, बाकी तब्बू ने संभाले। लेकिन वो भी दूसरे हाफ में गर्त में चले गए।

 

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एक्टिंग

फिल्म में आपको अजय देवगन निराश कर सकते हैं, वो इसलिए क्योंकि अगर कॉमेडी फिल्म के नाम पर आप अजय से गोलमाल की उम्मीद कर रहे हैं तो निराशा हो सकती है। क्योंकि वह एक पति, लवर और पिता के रूप में हर बार कन्फ्यूज ही दिखे और उनके पास कुछ खास पंच भी नहीं थे, जो शायद रोहित शेट्टी के साथ रहते उन्हें मिलते थे। तब्बू इस फिल्म को बांधकर रखती हैं, दूसरा हाफ पूरी तरह से उनपर ही निर्भर है। उनके पास कॉमिक टाइमिंग है, इमोशनल सीन है और नोकझोंक करने वाला मस्त अंदाज भी है, जिसमें उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है।

 

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