हाईकोर्ट ने नहीं दी गलत दवा देने वाले मामले में सुशांत की बहन प्रियंका को राहत, सतीश मानशिंदे बोले-''ये रिया के आंसुओं की जीत''

2/16/2021 9:52:56 AM

मुंबई:  दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत केस में 15 फरवरी दिन बेहद अहम था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े एक मामले में सोमवार यानि 15 फरवरी को फैसला सुनाया। यह मामला एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती द्वारा सुशांत की बहनों पर दर्ज एफआईआर का है।

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सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जहां सुशांत सिंह राजपूत की बहन मीतू सिंह के खिलाफ एफआईआर खारिज कर दी वहीं बहन प्रियंका सिंह पर हुई एफआईआर को खारिज नहीं किया गया है। वहीं रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानशिंदे ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।

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उन्होंने इसे रिया चक्रवर्ती के आंसुओं की जीत बताया है। मानशिंदे ने अपने बयान में कहा-बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस शिंदे और जस्टिस कार्णिक ने प्रियंका सिंह द्वारा लगाई गई वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने रिया चक्रवर्ती द्वारा उनके खिलाफ जालसाजी और NDPS एक्ट के अंतर्गत दर्ज कराई गई FIR रद्द करने की मांग की थी। हम फैसले से संतुष्ट हैं। ऐसा लग रहा है कि न्याय और सच्चाई के लिए बहे रिया चक्रवर्ती के आंसुओं की जीत हुई है। सत्यमेव जयते।

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रिया ने तीन लोगों पर केस किया था

बता दें कि रिया ने सुशांत की बहन मीतू सिंह, प्रियंका सिंह और राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉ. तरुण कुमार  के खिलाफ मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया था। तीनों पर फर्जी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन बनाकर सुशांत के लिए दवा देने का आरोप लगाया गया था। इस केस को सुशांत की बहनों ने ​नवंबर 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अर्जी में दावा किया था कि सुशांत के लिए दवाएं डॉक्टर ने ही लिखी थीं। उन्होंने कोई जुर्म नहीं किया है।

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सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा में सुसाइड किया था। सुशांत का शव बांद्रा में  उनके घर में पंखे से लटका मिला था। जांच में मुंबई पुलिस ने बताया था कि वे डिप्रेशन के शिकार थे और उन्‍होंने आत्महत्या की है। हालांकि, इस पूरे मामले में कई महीनों तक विवाद जारी रहा। बेटे के निधन के 15 दिन बाद सुशांत के पिता कृष्ण कुमार सिंह ने रिया चक्रवर्ती पर उनके बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाने और उनके बैंक खाते से 15 करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए पटना में FIR कराई थी। वहीं बिहार सरकार की अर्जी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंप दी थी। CBI लंबे समय से इस केस की जांच कर रही है पर अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची।


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Content Writer

Smita Sharma


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