MOVIE REVIEW: ''कालाकांडी''

Friday, January 12, 2018 12:11 PM
MOVIE REVIEW: ''कालाकांडी''

मुंबई: बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान की फिल्म 'कालाकांडी' आज रिलीज हो गई है। अक्षय वर्मा ने इस फिल्म से डायरैक्शन की फील्ड में डेब्यू किया है। हालांकि, डायरैक्शन में वे खास कमाल नहीं कर पाए। फिल्म 'कालाकांडी' एक तरह से ब्लैक कॉमेडी फिल्म है। इस फिल्म में तीन कहानियां पेरेलर चलती हैं। फिल्म की कहानी शुरू होती है रिहीन (सैफ अली खान) से, जिसने अपनी लाइफ में कभी कोई गलत काम नहीं किया और न ही वो गंदी आदतों का शिकार रहा है। लेकिन उसे अचानक कैंसर होने का पता चलता है। शराब, गुटखा, ड्रग्स जैसी चीजों से दूर रहने के बाद भी ऐसी बीमारी से होने पर वो तय करता है कि अब वो लाइफ में सबकुछ करेगा, जो उसने अभी तक नहीं करा है। वहीं, रिहीन का एक भाई है अंगद (अक्षय ओबेरॉय), जो शादी करने जा रहा है। अचानक उसकी मुलाकात होटल में एक्स गर्लफ्रैंड से होती, जो उससे काफी नाराज है। इस घटना के बाद रिहीन और अंगद रोड साइड घूमते है। रिहीन ने अभी-अभी ड्रग्स की दुनिया में कदम रखा है और वो एक ट्रांसजेंडर (नैरी सिंह) के संपर्क में आता है। वहीं, दूसरी और लवर की कहानी है, जिसमें सोभिता धुलिपला और आदित्य रॉय कपूर है। सोभिता प्यार को लेकर कन्फ्यूज है और आगे की पढ़ाई करने यूएस जाना चाहती है। यूएस जाने से पहले वो अपनी फ्रेंड की बर्थडे पार्टी अटेंड करती हैं। पार्टी में पुलिस भी पहुंच जाती है। फिल्म की कहानी में तीसरा ट्रैक अंडरवर्ल्ड डॉन (विजय राज और दीपक डोबरियाल) का दिखाया गया है। जो फिल्म प्रोड्यूसर से पैसा उगाई का काम करते हैं। कैसे ये सारे अचानक एक-दूसरे की जिंदगी में एंट्री लेते हैं, कैसे एक-दूसरे के साथ फंसते जाते हैं, इनकी लाइफ में और क्या -क्या घटता है, ये देखने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

फिल्म 'कालाकांडी अक्षय वर्मा की फिल्म है। फिल्म का डायरैक्शन ठीक है, लेकिन ओवरऑल बात करें तो फिल्म की कहानी बिखरी सी लगती है। फिल्म में तालमेल और स्थिरता का अभाव है। कुछ सीन्स बेहद निराश करते हैं। फिल्म में कई जगह बेवजह हास्य डाला गया है।

फिल्म में सैफ अली खान ने बेहतरीन एक्टिंग की है। कहा जा सकता है कि ये फिल्म पूरी तरह से सैफ की है। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग देखकर यह कह सकते हैं कि उन्होंने अपने एक्टिंग करियर का बेस्ट परफॉर्मेंस दिया है। बाकि स्टार्स में सोभिता धुलिपला इमोशनल सीन्स में फिट नहीं बैठी। विजय राज और दीपक डोबरियाल अपने रोल के साथ इंसाफ नहीं कर पाए। फिल्म का म्यूजिक भी खास नहीं है। फिल्म का म्यूजिक, सीन्स के मुताबिक फिट नहीं बैठता है।
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