Film Review: इमोशन कम, कनफ्यूजन ज्यादा है ‘मिर्जा जूलियट’ में

Saturday, April 8, 2017 12:00 AM
Film Review: इमोशन कम, कनफ्यूजन ज्यादा है ‘मिर्जा जूलियट’ में

मुंबईः जूली शुक्‍ला उर्फ जूलिएट की इस प्रेम कहानी का हीरो रोमियो नहीं, मिर्जा है। रोमियो-जूलिएट की तरह मिर्जा-साहिबा की प्रेम कहानी भी मशहूर रही है। इसी तरह की प्रेम कहानी को नए अंदाज में डायरेक्टर राजेश राम सिंह ने पेश किया है। इस फिल्म का नाम है ‘मिर्जा जूलिएट’।

यह कहानी इलाहाबाद के धर्मराज शुक्ला (प्रियांशु चटर्जी) की बहन जूली शुक्ला (पिया बाजपेयी) और मिर्जा (दर्शन कुमार) की है। जूली बचपन से ही भाइयों का लाड-प्यार में पली है। वह निडर है और आसपास के लोगों को भी ऐसा बनने की सीख देती है।

जूली की शादी शहर के दबंग के बेटे राजन (चंदन रॉय सान्याल) से फिक्स होती है जो उसके साथ शादी से पहले ही संबंध बनाने की कोशिश करता है। कहानी में ट्विस्ट और टर्न्स तब आते हैं जब मिर्जा और जूलियट के बीच प्यार होता है। इस बीच कहानी इलाहाबाद से नेपाल तक भी जाती है। फिल्म में एक्ट्रैस पिया बाजपेयी ने सहज अभिनय किया है। इससे एक खास एटीट्यूड उनके किरदार में दिखाई देता है।

वहीं दर्शन कुमार और चंदन रॉय सान्याल का काम भी अच्छा है। एक्टर प्रियांशु चटर्जी को एक अलग अवतार में देखना सरप्राइज फैक्टर है। सच कहे तो डायरेक्टर राजेश राम सिंह ने फिल्म पर पकड़ बनाकर रखी है और इसे शूट भी अच्छी लोकेशंस पर की है।

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी इसमें जान डालता है। ट्रीटमेंट और कॉन्सेप्ट के हिसाब से फिल्म को नॉर्थ बेल्ट में ज्यादा पसंद किया जा सकता है। फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी घि‍सी-पिटी कहानी है जो सदियों से चली आ रही है और हाल ही में कुछ ऐसी ही कहानी 'मिर्ज्या' फिल्म में भी राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने दिखाने की कोशिश की थी। वैसे इस फिल्म का प्लॉट और बेहतर हो सकता था।



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